Nishad Society

धर्म एवं कर्मकांड की परिवर्तन

आज हमें धर्मग्रंथो के आडम्बर से बाहर निकलना होगा, वेदो का अवलोकन करे तो कुछ बेहतर स्थिति पाएंगे, आज अपने समाज को धर्म एवं कर्मकांडो को लेकर भी क्रन्तिकारी परिवर्तन की जरूरत है. हमें आरक्षण के लिए दबाव बनाने के लिए इस तरह के परिवर्तन का अल्टीमेटम तो देना ही चाहिए। साथ ही साथ हमें समाज की एक टीम तैयार करनी चाहिए जो की एक नयी पद्दति विकसित कर सभी कर्मकांड स्वयं करने में सक्षम हो सके।

Ye kaam hamane to 5 saal pahale se hi shuru kar diya hai...

Bahut achhi baat hai. Lekin ispar aur teji se kaam karne ki jaroorat hai...Satish

I'm with your Satish G, And I believe that we will be on top in coming next few year...Our Comm don't know what can they do, but we have to play role of Jamwanth with Hanumana....and then they can feel own power.

thanks

आदिविद्रोही तिलका मांझी को संघर्षों का क्रांतिकारी सलाम

भारत के औपनिवेशिक युद्धों के इतिहास में जबकि पहला आदिविद्रोही होने का श्रेय पहाड़िया आदिम आदिवासी समुदाय के लड़ाकों को जाता हैं जिन्होंने राजमहल, झारखंड की पहाड़ियों पर ब्रितानी हुकूमत से लोहा लिया। इन पहाड़िया लड़ाकों में सबसे लोकप्रिय आदिविद्रोही जबरा या जौराह पहाड़िया उर्फ तिलका मांझी हैं। 13 जनवरी 1785 को अंग्रेजों ने तब भागलपुर के चौराहे पर स्थित एक विशाल वटवृक्ष पर सरेआम लटका कर उनकी जान ले ली। हजारों की भीड़ के सामने जबरा पहाड़िया उर्फ तिलका मांझी हंसते-हंसते फांसी पर झूल गए। आज तिलका मांझी के 232वें शहादत दिवस पर हम आपके साथ माखनलाल शोरी का लिखा यह लेख आपके साथ साझा कर रहे हैं जो तिलका मांझी के वीरतापूर्ण जीवन का विस्तृत विवरण है। तिलका मांझी का बलिदान आज भी भारत के आदिवासी संघर्षों को प्रेरणा देता हैl